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mahabharat 9.45.18: यहाँ पर बहुत अधिक संख्या होने के कारण जिनके नाम नहीं बताए गए हैं, वे सभी विविध देवता कुमार कार्तिकेय का अभिषेक करने के लिए भिन्न-भिन्न स्थानों से वहाँ आए थे॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 9.45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  9.45.18 
बहुलत्वाच्च नोक्ता ये विविधा देवतागणा:।
ते कुमाराभिषेकार्थं समाजग्मुस्ततस्तत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यहाँ पर बहुत अधिक संख्या होने के कारण जिनके नाम नहीं बताए गए हैं, वे सभी विविध देवता कुमार कार्तिकेय का अभिषेक करने के लिए भिन्न-भिन्न स्थानों से वहाँ आए थे॥ 18॥
 
All the various gods, whose names are not mentioned here because they were very large in number, had arrived there from different places to anoint Kumar Kartikeya.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)