श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  9.45.115 
तादृशानां सहस्राणि प्रयुतान्यर्बुदानि च।
अभिषिक्तं महात्मानं परिवार्योपतस्थिरे॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
अभिषेकके पश्चात् ऐसे हजारों, लाखों और करोड़ों पार्षद महात्मा स्कन्दको चारों ओरसे घेरकर खड़े हो गये ॥115॥
 
After the anointment, thousands, lakhs and billions of such councillors stood surrounding Mahatma Skanda from all sides. ॥ 115॥
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलरामतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने स्कन्दाभिषेके पञ्चचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलरामजीकी तीर्थयात्रा और सारस्वतोपाख्यानके प्रसंगमें स्कन्दका अभिषेकविषयक पैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४५॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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