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श्लोक  9.45.110 
शतघ्नीचक्रहस्ताश्च तथा मुसलपाणय:।
असिमुद्‍गरहस्ताश्च दण्डहस्ताश्च भारत॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! किसी के हाथ में शतघ्नी थी, किसी के हाथ में चक्र था। किसी के हाथ में मूसल थे, कोई तलवार, गदा और दण्ड लिए खड़े थे॥110॥
 
Bharatanandan! Some had Shataghni in their hands, some had Chakra. Some had pestles in their hands, some were standing with swords, maces and sticks.॥ 110॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)