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mahabharat 9.45.103: भारत! कुछ लोग नाना प्रकार के चमड़े के वस्त्रों से आवृत थे, नाना प्रकार की भाषाएँ बोलते थे, देश की सब भाषाओं में निपुण थे और आपस में बातचीत करने में समर्थ थे॥103॥   |   mahabharat अध्याय 9.45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  9.45.103 
नानाचर्मभिराच्छन्ना नानाभाषाश्च भारत।
कुशला देशभाषासु जल्पन्तोऽन्योन्यमीश्वरा:॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
भारत! कुछ लोग नाना प्रकार के चमड़े के वस्त्रों से आवृत थे, नाना प्रकार की भाषाएँ बोलते थे, देश की सब भाषाओं में निपुण थे और आपस में बातचीत करने में समर्थ थे॥103॥
 
Bharat! Some people were covered with various kinds of leather clothes, spoke various languages, were proficient in all the languages ​​of the country and were able to communicate with each other.॥ 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)