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mahabharat 9.45.1: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! तत्पश्चात बृहस्पतिजी ने समस्त अभिषेक सामग्री एकत्रित करके शास्त्रीय विधि से प्रज्वलित अग्नि में विधिपूर्वक उन्हें दाहित कर दिया॥1॥   |   mahabharat अध्याय 9.45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.45.1 
वैशम्पायन उवाच
ततोऽभिषेकसम्भारान् सर्वान् सम्भृत्य शास्त्रत:।
बृहस्पति: समिद्धेऽग्नौ जुहावाग्निं यथाविधि॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! तत्पश्चात बृहस्पतिजी ने समस्त अभिषेक सामग्री एकत्रित करके शास्त्रीय विधि से प्रज्वलित अग्नि में विधिपूर्वक उन्हें दाहित कर दिया॥1॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Thereafter, Brihaspati ji collected all the consecration materials and ritually burnt them in the fire lit according to the classical method. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)