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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 44: कुमार कार्तिकेयका प्राकट्य और उनके अभिषेककी तैयारी  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  9.44.53 
तत्र तीरे सरस्वत्या: पुण्ये सर्वगुणान्विते।
निषेदुर्देवगन्धर्वा: सर्वे सम्पूर्णमानसा:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ वे सभी देवता और गंधर्व अपनी-अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करके सरस्वती नदी के पवित्र तट पर बैठ गए।
 
There, all those Gods and Gandharvas, with their wishes fulfilled, sat on the sacred banks of the river Saraswati.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने कुमाराभिषेकोपक्रमे चतुश्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्रा और सारस्वतोपाख्यानके प्रसंगमें कुमारके अभिषेककी तैयारीविषयक चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)