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mahabharat 9.44.51-52: तब ब्रह्मा आदि देवता अभिषेक के लिए कुमार को साथ लेकर हिमालय पर्वत पर गए और वहां से निकलने वाली पवित्र नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती नदी के तट पर गए, जो समन्त पंचक तीर्थ में प्रवाहित होती है और तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।   |   mahabharat अध्याय 9.44: कुमार कार्तिकेयका प्राकट्य और उनके अभिषेककी तैयारी   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 44: कुमार कार्तिकेयका प्राकट्य और उनके अभिषेककी तैयारी  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  9.44.51-52 
तत: कुमारमादाय देवा ब्रह्मपुरोगमा:।
अभिषेकार्थमाजग्मु: शैलेन्द्रं सहितास्तत:॥ ५१॥
पुण्यां हैमवतीं देवीं सरिच्छ्रेष्ठां सरस्वतीम्।
समन्तपञ्चके या वै त्रिषु लोकेषु विश्रुता॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्मा आदि देवता अभिषेक के लिए कुमार को साथ लेकर हिमालय पर्वत पर गए और वहां से निकलने वाली पवित्र नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती नदी के तट पर गए, जो समन्त पंचक तीर्थ में प्रवाहित होती है और तीनों लोकों में प्रसिद्ध है।
 
Then Brahma and other gods took Kumar for the anointment and together they went to the Himalaya mountain range to the banks of the Saraswati river, the best of the holy rivers originating from there, which flows in the Samant Panchak Tirtha and is famous in all the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)