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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 44: कुमार कार्तिकेयका प्राकट्य और उनके अभिषेककी तैयारी  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.44.41 
सर्वे भासुरदेहास्ते चत्वार: समरूपिण:।
तान् समभ्ययुरव्यग्रास्तदद्भुतमिवाभवत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
चारों कुमारों का रूप एक जैसा था। उनके शरीर तेज से चमक रहे थे। चारों कुमार एक साथ उनके पास पहुँचे। यह अद्भुत कार्य था।
 
The appearance of all four of them was similar. All their bodies were glowing with radiance. All the four Kumaras reached them together. It was a wonderful feat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)