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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 44: कुमार कार्तिकेयका प्राकट्य और उनके अभिषेककी तैयारी  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  9.44.38-39 
एवं स कृत्वा ह्यात्मानं चतुर्धा भगवान् प्रभु:॥ ३८॥
यतो रुद्रस्तत: स्कन्दो जगामाद्भुतदर्शन:।
विशाखस्तु ययौ येन देवी गिरिवरात्मजा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार चार रूपों में प्रकट होकर, अद्भुत एवं प्रभावशाली भगवान स्कंद उस स्थान पर गए जहाँ रुद्र विराजमान थे। विशाखा उस ओर गईं जहाँ गिरिराजनंदनी उमा देवी विराजमान थीं।
 
Having thus manifested himself in four forms, the wonderful and impressive Lord Skanda went to the place where Rudra was. Visakha went to the side where Girirajanandani Uma Devi was sitting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)