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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 44: कुमार कार्तिकेयका प्राकट्य और उनके अभिषेककी तैयारी  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.44.17 
शमेन तपसा चैव वीर्येण च समन्वित:।
ववृधेऽतीव राजेन्द्र चन्द्रवत् प्रियदर्शन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! वह बालक शांति, तप और पराक्रम से युक्त होकर बड़ी तेजी से बढ़ने लगा। वह चन्द्रमा के समान सुन्दर दिखाई देने लगा।
 
Rajendra! That boy, endowed with calmness, austerity and valour, started growing at a great pace. He looked as beautiful as the moon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)