Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.43.49: उसमें दैत्यों का नाश करने वाले महासेन कार्तिकेय ने देवताओं की आज्ञा ग्रहण की। जहाँ वह उत्तम पाकड़ वृक्ष है, उस तीर्थ में साक्षात् कुमार कार्तिकेय सदैव निवास करते हैं। 49॥ | mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सैनापत्यं लब्धवान् देवतानां
महासेनो यत्र दैत्यान्तकर्ता।
साक्षाच्चैवं न्यवसत् कार्तिकेय:
सदा कुमारो यत्र स प्लक्षराज:॥ ४९॥
अनुवाद
उसमें दैत्यों का नाश करने वाले महासेन कार्तिकेय ने देवताओं की आज्ञा ग्रहण की। जहाँ वह उत्तम पाकड़ वृक्ष है, उस तीर्थ में साक्षात् कुमार कार्तिकेय सदैव निवास करते हैं। 49॥
In that, Mahasen Kartikeya, the destroyer of demons, assumed the command of the gods. Where there is that best Pakad tree, Kumar Kartikeya in person always resides in this pilgrimage site. 49॥
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें
सारस्वतोपाख्यानविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥