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mahabharat 9.43.45: हे भारत श्रेष्ठ! नमूचिका! वह मुखिया भी उसी तीर्थ में डुबकी लगाकर मनोवांछित फल देने वाले सनातन लोकों में चला गया ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  9.43.45 
शिरस्तच्चापि नमुचेस्तत्रैवाप्लुत्य भारत।
लोकान् कामदुघान् प्राप्तमक्षयान् राजसत्तम॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे भारत श्रेष्ठ! नमूचिका! वह मुखिया भी उसी तीर्थ में डुबकी लगाकर मनोवांछित फल देने वाले सनातन लोकों में चला गया ॥45॥
 
India The best! Namuchika, that head also took a dip in the same pilgrimage and went to the eternal worlds which give the desired results. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)