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mahabharat 9.43.38-39h: इस प्रकार उस मुखिया द्वारा बार-बार उपर्युक्त प्रश्न पूछे जाने पर इन्द्र अत्यन्त दुःखी हो गये और उन्होंने ब्रह्माजी से सारी बात कह सुनाई।   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  9.43.38-39h 
एवं स शिरसा तेन चोद्यमान: पुन: पुन:॥ ३८॥
पितामहाय संतप्त एतमर्थं न्यवेदयत्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उस मुखिया द्वारा बार-बार उपर्युक्त प्रश्न पूछे जाने पर इन्द्र अत्यन्त दुःखी हो गये और उन्होंने ब्रह्माजी से सारी बात कह सुनाई।
 
Being thus asked the above mentioned question again and again by that head, Indra became very distressed and narrated the whole matter to Lord Brahma. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)