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mahabharat 9.43.36-37h: हे राजन! यह प्रतिज्ञा करने के बाद भी जब इन्द्र ने चारों ओर कोहरा देखा तो उन्होंने जल के फेन से नमूचिका का सिर काट दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  9.43.36-37h 
एवं स कृत्वा समयं दृष्ट्वा नीहारमीश्वर:॥ ३६॥
चिच्छेदास्य शिरो राजन्नपां फेनेन वासव:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! यह प्रतिज्ञा करने के बाद भी जब इन्द्र ने चारों ओर कोहरा देखा तो उन्होंने जल के फेन से नमूचिका का सिर काट दिया।
 
O King! Even after making this vow, Lord Indra, seeing that there was fog all around, cut off Namuchika's head with the foam of water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)