Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.43.34-36h: पहले ऐसा हुआ था कि नमुचि इंद्र के भय से सूर्य की किरणों में छिप गया था। तब इंद्र ने उससे मित्रता की और वचन दिया, "हे दैत्यश्रेष्ठ! मैं तुम्हें न तो गीले अस्त्र से मारूँगा, न सूखे अस्त्र से। न दिन में मारूँगा, न रात में। हे मित्र! मैं तुमसे सत्य की शपथ लेकर यह कह रहा हूँ।" | mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नमुचिर्वासवाद् भीत: सूर्यरश्मिं समाविशत्॥ ३४॥
तेनेन्द्र: सख्यमकरोत् समयं चेदमब्रवीत्।
न चार्द्रेण न शुष्केण न रात्रौ नापि चाहनि॥ ३५॥
वधिष्याम्यसुरश्रेष्ठ सखे सत्येन ते शपे।
अनुवाद
पहले ऐसा हुआ था कि नमुचि इंद्र के भय से सूर्य की किरणों में छिप गया था। तब इंद्र ने उससे मित्रता की और वचन दिया, "हे दैत्यश्रेष्ठ! मैं तुम्हें न तो गीले अस्त्र से मारूँगा, न सूखे अस्त्र से। न दिन में मारूँगा, न रात में। हे मित्र! मैं तुमसे सत्य की शपथ लेकर यह कह रहा हूँ।"
It happened earlier that Namuchi, out of fear of Indra, had hidden himself in the rays of the sun. Then Indra befriended him and made a promise, 'O best of demons! I will neither kill you with a wet weapon nor a dry one. I will not kill you during the day nor during the night. Friend! I am telling you this by swearing on the truth.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥