Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.43.31-32h: राजन! कहते हैं कि यह जानकर देवराज इन्द्र उसी तीर्थ में स्नान करके ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो गए थे। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  9.43.31-32h 
एतमर्थमभिज्ञाय देवराज: शतक्रतु:॥ ३१॥
तस्मिंस्तीर्थे वरे स्नात्वा विमुक्त: पाप्मना किल।
 
 
अनुवाद
राजन! कहते हैं कि यह जानकर देवराज इन्द्र उसी तीर्थ में स्नान करके ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो गए थे। 31 1/2॥
 
Rajan! It is said that after knowing this, Devraj Indra was freed from the sin of Brahmahatya by taking bath in the same holy place. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)