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mahabharat 9.43.29-31h: हे पुरुषश्रेष्ठ! ऋषियों का मत जानकर नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती ने अपना एक रूप अरुणा प्रकट किया। महाराज! उस अरुणा में स्नान करके वे राक्षस शरीर त्यागकर स्वर्ग को चले गए; क्योंकि वह ब्रह्महत्या से बचाता है।   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 29-31h
 
 
श्लोक  9.43.29-31h 
महर्षीणां मतं ज्ञात्वा तत: सा सरितां वरा॥ २९॥
अरुणामानयामास स्वां तनूं पुरुषर्षभ।
तस्यां ते राक्षसा: स्नात्वा तनूस्त्यक्त्वा दिवं गता:॥ ३०॥
अरुणायां महाराज ब्रह्मवध्यापहा हि सा।
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! ऋषियों का मत जानकर नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती ने अपना एक रूप अरुणा प्रकट किया। महाराज! उस अरुणा में स्नान करके वे राक्षस शरीर त्यागकर स्वर्ग को चले गए; क्योंकि वह ब्रह्महत्या से बचाता है।
 
O best of men! Knowing the opinion of the sages, Saraswati, the best of the rivers, brought Aruna, a form of herself. Maharaj! After bathing in that Aruna, those demons left their bodies and went to heaven; because it prevents the killing of a brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)