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mahabharat 9.43.28-29h: तत्पश्चात् उन तपोधन महर्षियों ने उस तीर्थ को पवित्र किया और सरस्वती नदी से उन दैत्यों को मुक्त करने की प्रार्थना की ॥28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  9.43.28-29h 
शोधयित्वा ततस्तीर्थमृषयस्ते तपोधना:॥ २८॥
मोक्षार्थं राक्षसानां च नदीं तां प्रत्यचोदयन्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन तपोधन महर्षियों ने उस तीर्थ को पवित्र किया और सरस्वती नदी से उन दैत्यों को मुक्त करने की प्रार्थना की ॥28 1/2॥
 
Thereafter, those Tapodhan Maharishis purified that Tirtha and requested the Saraswati River to liberate those demons. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)