Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.43.26-28h: जिस अन्न पर थूका गया हो, जिसमें कीड़े हों, जो अशुद्ध हो, जिस पर रोएँ हों, जो तिरस्कारपूर्वक ग्रहण किया गया हो, जो आँसुओं से दूषित हो और जिसे कुत्तों ने छुआ हो, वह सब इस संसार में राक्षसों का भाग है। इसलिए विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह इन सब प्रकार के अन्नों को भली-भाँति समझकर त्याग दे। जो ऐसा अन्न खाता है, वह राक्षसों का अन्न खाने के समान है।॥26-27 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षुतं कीटावपन्नं च यच्चोच्छिष्टाचितं भवेत्।
सकेशमवधूतं च रुदितोपहतं च यत्॥ २६॥
स्वभि: संसृष्टमन्नं च भागोऽसौ रक्षसामिह।
तस्माज्ज्ञात्वा सदा विद्वानेतान् यत्नाद् विवर्जयेत् ॥ २७॥
राक्षसान्नमसौ भुङ्क्ते यो भुङ्क्ते ह्यन्नमीदृशम्।
अनुवाद
जिस अन्न पर थूका गया हो, जिसमें कीड़े हों, जो अशुद्ध हो, जिस पर रोएँ हों, जो तिरस्कारपूर्वक ग्रहण किया गया हो, जो आँसुओं से दूषित हो और जिसे कुत्तों ने छुआ हो, वह सब इस संसार में राक्षसों का भाग है। इसलिए विद्वान पुरुष को चाहिए कि वह इन सब प्रकार के अन्नों को भली-भाँति समझकर त्याग दे। जो ऐसा अन्न खाता है, वह राक्षसों का अन्न खाने के समान है।॥26-27 1/2॥
‘The food that has been spit upon, that has worms in it, that is unclean, that has hair on it, that is received with disdain, that is contaminated by tears and that has been touched by dogs, all that food is the lot of demons in this world. Therefore, a learned person should always try and renounce all these types of food after due understanding. One who eats such food is as if eating the food of demons.’॥ 26-27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥