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mahabharat 9.43.25: दैत्यों के वचन सुनकर एकाग्रचित्त ऋषियों ने उनके उद्धार के लिए महाप्रतापी सरस्वती नदी की स्तुति की और इस प्रकार कहा -॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  9.43.25 
तेषां तु वचनं श्रुत्वा तुष्टुवुस्तां महानदीम्।
मोक्षार्थं रक्षसां तेषामूचु: प्रयतमानसा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
दैत्यों के वचन सुनकर एकाग्रचित्त ऋषियों ने उनके उद्धार के लिए महाप्रतापी सरस्वती नदी की स्तुति की और इस प्रकार कहा -॥ 25॥
 
Having heard the words of the demons, the sages with concentrated minds praised the mighty river Saraswati for their salvation and said thus -॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)