Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.43.21-22: स्त्रियाँ अपने योनि दोषों के कारण उत्पन्न पाप (व्यभिचार) के कारण राक्षसी हो जाती हैं। इसी प्रकार क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों में से जो ब्राह्मणों से द्वेष करते हैं, वे भी इस संसार में राक्षस हो जाते हैं। | mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योषितां चैव पापेन योनिदोषकृतेन च॥ २१॥
एवं हि वैश्यशूद्राणां क्षत्रियाणां तथैव च।
ये ब्राह्मणान् प्रद्विषन्ति ते भवन्तीह राक्षसा:॥ २२॥
अनुवाद
स्त्रियाँ अपने योनि दोषों के कारण उत्पन्न पाप (व्यभिचार) के कारण राक्षसी हो जाती हैं। इसी प्रकार क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों में से जो ब्राह्मणों से द्वेष करते हैं, वे भी इस संसार में राक्षस हो जाते हैं।
‘Women become demons due to the sin (adultery) caused by their vaginal defects. Similarly, those among the Kshatriyas, Vaishyas and Shudras who hate the Brahmins also become demons in this world. 21-22.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥