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mahabharat 9.43.12: भोली सरस्वती! हमने शाप और उसका कारण सुन लिया है। ये सभी तपस्वी इस विषय में अपना समयानुकूल कर्तव्य पालन करेंगे।'॥12॥   |   mahabharat अध्याय 9.43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 43: ऋषियोंके प्रयत्नसे सरस्वतीके शापकी निवृत्ति, जलकी शुद्धि तथा अरुणासंगममें स्नान करनेसे राक्षसों और इन्द्रका संकटमोचन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.43.12 
कारणं श्रुतमस्माभि: शापश्चैव श्रुतोऽनघे।
करिष्यन्ति तु यत् प्राप्तं सर्व एव तपोधना:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भोली सरस्वती! हमने शाप और उसका कारण सुन लिया है। ये सभी तपस्वी इस विषय में अपना समयानुकूल कर्तव्य पालन करेंगे।'॥12॥
 
‘Innocent Saraswati! We have heard the curse and its reason. All these ascetics will perform their timely duty in this matter.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)