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mahabharat 9.42.40-41h: तदनन्तर सरस्वती को उस अवस्था में देखकर ऋषि, देवता, गन्धर्व और अप्सराएँ अत्यन्त दुःखी हो गये ॥40 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  9.42.40-41h 
अथर्षयश्च देवाश्च गन्धर्वाप्सरसस्तदा॥ ४०॥
सरस्वतीं तथा दृष्ट्वा बभूवुर्भृशदु:खिता:।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर सरस्वती को उस अवस्था में देखकर ऋषि, देवता, गन्धर्व और अप्सराएँ अत्यन्त दुःखी हो गये ॥40 1/2॥
 
Thereafter the sages, gods, Gandharvas and Apsaras became very sad to see Saraswati in that state. 40 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)