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mahabharat 9.42.4: सरस्वती के स्थाणुतीर्थ में पूर्व तट पर वशिष्ठजी का बड़ा आश्रम था और पश्चिम तट पर बुद्धिमान विश्वामित्र मुनिका का आश्रम बना हुआ था। 4॥   |   mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.42.4 
आश्रमो वै वसिष्ठस्य स्थाणुतीर्थेऽभवन्महान्।
पूर्वत: पार्श्वतश्चासीद् विश्वामित्रस्य धीमत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सरस्वती के स्थाणुतीर्थ में पूर्व तट पर वशिष्ठजी का बड़ा आश्रम था और पश्चिम तट पर बुद्धिमान विश्वामित्र मुनिका का आश्रम बना हुआ था। 4॥
 
In the Sthanutirtha of Saraswati, there was a big ashram of Vashishtha on the east bank and the ashram of wise Vishwamitra Munika was built on the west bank. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)