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mahabharat 9.42.35: सरस्वती द्वारा लाए गए वसिष्ठ को देखकर विश्वामित्र क्रोधित हो गए और वसिष्ठ के प्राण हरने के लिए शस्त्र ढूँढ़ने लगे॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  9.42.35 
तमानीतं सरस्वत्या दृष्ट्वा कोपसमन्वित:।
अथान्वेषत् प्रहरणं वसिष्ठान्तकरं तदा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
सरस्वती द्वारा लाए गए वसिष्ठ को देखकर विश्वामित्र क्रोधित हो गए और वसिष्ठ के प्राण हरने के लिए शस्त्र ढूँढ़ने लगे॥ 35॥
 
On seeing Vasishtha brought by Saraswati, Visvamitra became enraged and began to look for a weapon to put an end to Vasishtha's life.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)