Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.42.33-34: राजन! महर्षि के मुख से ऐसी स्तुति सुनकर सरस्वती अपने वेग से उन ब्रह्मर्षि को विश्वामित्र के आश्रम में ले गईं और विश्वामित्र से बार-बार अनुरोध किया कि 'वशिष्ठ मुनि उपस्थित हैं' ॥33-34॥ | mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! महर्षि के मुख से ऐसी स्तुति सुनकर सरस्वती अपने वेग से उन ब्रह्मर्षि को विश्वामित्र के आश्रम में ले गईं और विश्वामित्र से बार-बार अनुरोध किया कि 'वशिष्ठ मुनि उपस्थित हैं' ॥33-34॥
Rajan! Hearing such praise from the mouth of Maharishi, Saraswati, with her speed, took that Brahmarishi to Vishwamitra's ashram and repeatedly requested Vishwamitra that 'Vashishtha Muni is present'. 33-34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥