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श्लोक  9.42.3 
वैशम्पायन उवाच
विश्वामित्रस्य विप्रर्षेर्वसिष्ठस्य च भारत।
भृशं वैरमभूद् राजंस्तप:स्पर्धाकृतं महत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन ने कहा, 'भरत! तपस्या में प्रतिस्पर्धा के कारण विश्वामित्र और ब्रह्मर्षि वशिष्ठ में घोर शत्रुता हो गई।
 
Vaishmpayana said, 'Bharata! Due to competition in penance, there was a great enmity between Vishwamitra and Brahmarishi Vasishtha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)