Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.42.24: वशिष्ठ बोले, "हे सरस्वती, सब नदियों में श्रेष्ठ, तुम तीव्र गति से बहो और मुझे अपने साथ ले जाओ तथा अपनी रक्षा करो, अन्यथा विश्वामित्र तुम्हें शाप दे देंगे; इसलिए तुम अन्य किसी बात का विचार मत करो।" | mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वसिष्ठ उवाच
पाह्यात्मानं सरिच्छ्रेष्ठे वह मां शीघ्रगामिनी।
विश्वामित्र: शपेद्धि त्वां मा कृथास्त्वं विचारणाम्॥ २४॥
अनुवाद
वशिष्ठ बोले, "हे सरस्वती, सब नदियों में श्रेष्ठ, तुम तीव्र गति से बहो और मुझे अपने साथ ले जाओ तथा अपनी रक्षा करो, अन्यथा विश्वामित्र तुम्हें शाप दे देंगे; इसलिए तुम अन्य किसी बात का विचार मत करो।"
Vasishtha said, "O Saraswati, the best of all rivers, flow fast and carry me along and save yourself, otherwise Vishwamitra will curse you; therefore do not think of anything else."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥