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mahabharat 9.42.23: राजन! उसे दुर्बल, दुःखी और चिन्तित देखकर मनुष्यों में श्रेष्ठ पुण्यात्मा वशिष्ठजी बोले॥23॥   |   mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  9.42.23 
तां कृशां च विवर्णां च दृष्ट्वा चिन्तासमन्विताम्।
उवाच राजन् धर्मात्मा वसिष्ठो द्विपदां वर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राजन! उसे दुर्बल, दुःखी और चिन्तित देखकर मनुष्यों में श्रेष्ठ पुण्यात्मा वशिष्ठजी बोले॥23॥
 
Rajan! Seeing him weak, sad and worried, Vashishtha, the most virtuous among humans, said. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)