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mahabharat 9.42.19: उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर ऋषि ने महानदी से कहा, 'बिना किसी संदेह के वशिष्ठ को मेरे पास ले आओ।'   |   mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  9.42.19 
तथारूपां तु तां दृष्ट्वा मुनिराह महानदीम्।
अविचारं वसिष्ठं त्वमानयस्वान्तिकं मम॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर ऋषि ने महानदी से कहा, 'बिना किसी संदेह के वशिष्ठ को मेरे पास ले आओ।'
 
Seeing him in such a state the sage said to the great river, 'Without any second thoughts bring Vasishtha to me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)