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mahabharat 9.42.13: ऐसा निश्चय करके पूज्य महामुनि विश्वामित्र की आँखें क्रोध से लाल हो गईं और उन्होंने नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती का स्मरण किया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 9.42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 42: वसिष्ठापवाह तीर्थकी उत्पत्तिके प्रसंगमें विश्वामित्रका क्रोध और वसिष्ठजीकी सहनशीलता  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.42.13 
एवं निश्चित्य भगवान् विश्वामित्रो महामुनि:।
सस्मार सरितां श्रेष्ठां क्रोधसंरक्तलोचन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा निश्चय करके पूज्य महामुनि विश्वामित्र की आँखें क्रोध से लाल हो गईं और उन्होंने नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती का स्मरण किया॥13॥
 
Having made this decision, the eyes of revered Mahamuni Vishwamitra became bloodshot with anger. He remembered Saraswati, the best among rivers. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)