श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक d1h-6h
 
 
श्लोक  9.41.d1h-6h 
(तत्र ते लेभिरे राजन् पञ्चालेभ्यो महर्षय:)
बलान्वितान् वत्सतरान् निर्व्याधीनेकविंशतिम्।
तानब्रवीद् बको दाल्भ्यो विभजध्वं पशूनिति॥ ५॥
पशूनेतानहं त्यक्त्वा भिक्षिष्ये राजसत्तमम्।
 
 
अनुवाद
राजन! वहाँ ऋषियों को पांचालों से इक्कीस बलवान और निरोगी बछड़े प्राप्त हुए। तब दल्भ के पुत्र बक ने अन्य सभी ऋषियों से कहा, "आप लोग इन पशुओं को आपस में बाँट लीजिए। मैं इन्हें छोड़कर किसी श्रेष्ठ राजा से कोई अन्य पशु माँग लूँगा।"
 
King! There the sages received twenty-one strong and disease-free calves from the Panchalas. Then Bak, son of Dalbha, said to all the other sages, 'You all divide these animals. I will leave these and ask for some other animal from a great king.' 5 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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