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mahabharat 9.41.38: यह जानकर कि राजा ने स्वयं ही वह उत्तम दान किया है, ब्राह्मण बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने राजा ययाति को आशीर्वाद दिया तथा उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।   |   mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  9.41.38 
ते मन्यमाना राज्ञस्तु सम्प्रदानमनुत्तमम्।
राजानं तुष्टुवु: प्रीता दत्त्वा चैवाशिष: शुभा:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि राजा ने स्वयं ही वह उत्तम दान किया है, ब्राह्मण बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने राजा ययाति को आशीर्वाद दिया तथा उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।
 
Realizing that the king himself had made that excellent donation, the Brahmins became very happy and blessed King Yayati and praised him profusely.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)