Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.41.36-37: राजा के यज्ञमण्डप में आमंत्रित ब्राह्मण जहाँ भी ठहरता था, वहाँ नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती उसके लिए पृथक् भवन, शय्या, आसन, चार सौ प्रकार के भोजन और नाना प्रकार के दान की व्यवस्था करती थीं ॥36-37॥ | mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो यत्र स्थित एवेह आहूतो यज्ञसंस्तरे॥ ३६॥
तस्य तस्य सरिच्छ्रेष्ठा गृहादिशयनादिकम्।
षड्रसं भोजनं चैव दानं नानाविधं तथा॥ ३७॥
अनुवाद
राजा के यज्ञमण्डप में आमंत्रित ब्राह्मण जहाँ भी ठहरता था, वहाँ नदियों में श्रेष्ठ सरस्वती उसके लिए पृथक् भवन, शय्या, आसन, चार सौ प्रकार के भोजन और नाना प्रकार के दान की व्यवस्था करती थीं ॥36-37॥
Wherever the Brahmin who had been invited to the king's Yagya Mandap stayed, Saraswati, the best among the rivers, arranged for him a separate house, bed, seat, four hundred meals and various types of donations. 36-37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥