Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.41.35-36h: जब शक्तिशाली राजा ययाति वहाँ यज्ञ कर रहे थे, तब उनकी महान उदारता और अपने प्रति उनकी शाश्वत भक्ति देखकर सरस्वती ने यज्ञ करने आए ब्राह्मणों को सभी इच्छित सुख प्रदान किए ॥35 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  9.41.35-36h 
पुनस्तत्र च राज्ञस्तु ययातेर्यजत: प्रभो:।
औदार्यं परमं कृत्वा भक्तिं चात्मनि शाश्वतीम्॥ ३५॥
ददौ कामान् ब्राह्मणेभ्यो यान् यान् यो मनसेच्छति।
 
 
अनुवाद
जब शक्तिशाली राजा ययाति वहाँ यज्ञ कर रहे थे, तब उनकी महान उदारता और अपने प्रति उनकी शाश्वत भक्ति देखकर सरस्वती ने यज्ञ करने आए ब्राह्मणों को सभी इच्छित सुख प्रदान किए ॥35 1/2॥
 
When the powerful king Yayati was performing a sacrifice there, seeing his great generosity and his eternal devotion towards her, Saraswati gave all the desired pleasures to the Brahmins who had come to perform the sacrifice. ॥ 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)