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mahabharat 9.41.33: महाराज! पूर्वकाल में नहुषनन्द के पुत्र महापुरुष ययाति ने वहाँ यज्ञ किया था, जिसमें सरस्वती ने उनके लिए दूध और घी का स्रोत प्रवाहित किया था॥33॥   |   mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.41.33 
तत्र यज्ञे ययातेश्च महाराज सरस्वती।
सर्पि: पयश्च सुस्राव नाहुषस्य महात्मन:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! पूर्वकाल में नहुषनन्द के पुत्र महापुरुष ययाति ने वहाँ यज्ञ किया था, जिसमें सरस्वती ने उनके लिए दूध और घी का स्रोत प्रवाहित किया था॥33॥
 
Maharaj! In the past, the great soul Yayati, the son of Nahushanand, had performed a yajna there, in which Saraswati had poured out a source of milk and ghee for him. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)