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श्लोक 9.41.28  |
धृतराष्ट्रोऽपि धर्मात्मा स्वस्थचेता महामना:।
स्वमेव नगरं राजन् प्रतिपेदे महर्द्धिमत्॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! तब महाबुद्धिमान एवं पुण्यात्मा धृतराष्ट्र भी स्वस्थ मन से अपने समृद्ध नगर को लौट आये। |
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| Rajan! Then the great-minded and virtuous Dhritarashtra also returned to his prosperous city with a healthy mind. |
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