श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  9.41.28 
धृतराष्ट्रोऽपि धर्मात्मा स्वस्थचेता महामना:।
स्वमेव नगरं राजन् प्रतिपेदे महर्द्धिमत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजन! तब महाबुद्धिमान एवं पुण्यात्मा धृतराष्ट्र भी स्वस्थ मन से अपने समृद्ध नगर को लौट आये।
 
Rajan! Then the great-minded and virtuous Dhritarashtra also returned to his prosperous city with a healthy mind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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