श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  9.41.25 
तं तथा विलपन्तं तु शोकोपहतचेतसम्।
दृष्ट्वा तस्य कृपा जज्ञे राष्ट्रं तस्य व्यमोचयत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र को दुःख से रोते हुए देखकर वे दया से भर गए और राजा के राज्य को संकट से मुक्त कर दिया॥ 25॥
 
Seeing King Dhritarashtra weeping in grief, he was filled with compassion and freed the king's kingdom from the crisis.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)