श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  9.41.22 
अपां कुञ्जे सरस्वत्यास्तं प्रसादय पार्थिव।
सरस्वतीं ततो गत्वा स राजा बकमब्रवीत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
"राजन्! वह ऋषि सरस्वती के कुंज में जल के पास बैठे हैं। आप उन पर कृपा करें।" तब राजा सरस्वती के तट पर गए और बक ऋषि से इस प्रकार बोले।
 
"King! That sage is sitting near the water in the bower of Saraswati. Please please please him." Then the king went to the bank of Saraswati and spoke thus to sage Bak. 22.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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