Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.41.19: हे मनुष्यों के स्वामी जनमेजय! जब धृतराष्ट्र अपने राष्ट्र को उस विपत्ति से मुक्त करने में असमर्थ हो गए, तब उन्होंने प्रश्निकों (जो पूछने पर भूत, वर्तमान और भविष्य का हाल बताते हैं) को बुलाकर उनसे इसका कारण पूछा॥19॥   |   mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  9.41.19 
यदा चापि न शक्नोति राष्ट्रं मोक्षयितुं नृप।
अथ वै प्राश्निकांस्तत्र पप्रच्छ जनमेजय॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी जनमेजय! जब धृतराष्ट्र अपने राष्ट्र को उस विपत्ति से मुक्त करने में असमर्थ हो गए, तब उन्होंने प्रश्निकों (जो पूछने पर भूत, वर्तमान और भविष्य का हाल बताते हैं) को बुलाकर उनसे इसका कारण पूछा॥19॥
 
O lord of men, Janamejaya! When Dhritarashtra was unable to free his nation from that calamity, he called the praashniks (those who tell about the past, present and future when asked) and asked them the reason for this.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)