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mahabharat 9.41.18: जब राजा किसी भी प्रकार से अपने राष्ट्र का कल्याण सुनिश्चित करने में असमर्थ हो गया और उसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होने लगी, तो राजा और ब्राह्मणों को बहुत दुःख हुआ।   |   mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.41.18 
न च श्रेयोऽध्यगच्छत्तु क्षीयते राष्ट्रमेव च।
यदा स पार्थिव: खिन्नस्ते च विप्रास्तदानघ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब राजा किसी भी प्रकार से अपने राष्ट्र का कल्याण सुनिश्चित करने में असमर्थ हो गया और उसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होने लगी, तो राजा और ब्राह्मणों को बहुत दुःख हुआ।
 
When the King was unable to ensure the welfare of his nation in any way and it started declining day by day, the King and the Brahmins felt very sad. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)