Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.41.16-17: हे राजन! अपने राष्ट्र को इस संकट में देखकर राजा बहुत दुःखी हुए और गहन चिंतन में डूब गए। तब उन्होंने ब्राह्मणों के साथ मिलकर अपने राष्ट्र को इस संकट से बचाने का प्रयत्न शुरू कर दिया। | mahabharat अध्याय 9.41: अवाकीर्ण और यायात तीर्थकी महिमाके प्रसंगमें दाल्भ्यकी कथा और ययातिके यज्ञका वर्णन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वा तथावकीर्णं तु राष्ट्रं स मनुजाधिप:॥ १६॥
बभूव दुर्मना राजंश्चिन्तयामास च प्रभु:।
मोक्षार्थमकरोद् यत्नं ब्राह्मणै: सहित: पुरा॥ १७॥
अनुवाद
हे राजन! अपने राष्ट्र को इस संकट में देखकर राजा बहुत दुःखी हुए और गहन चिंतन में डूब गए। तब उन्होंने ब्राह्मणों के साथ मिलकर अपने राष्ट्र को इस संकट से बचाने का प्रयत्न शुरू कर दिया।
O King! Seeing his nation in such a crisis, the king became very sad and was drowned in deep thoughts. Then, along with the Brahmins, he started trying to save his nation from the crisis.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥