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श्लोक  9.41.14 
तस्मिंस्तु विधिवत् सत्रे सम्प्रवृत्ते सुदारुणे।
अक्षीयत ततो राष्ट्रं धृतराष्ट्रस्य पार्थिव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब से विधिपूर्वक वह भयंकर यज्ञ आरम्भ हुआ, तब से धृतराष्ट्र के राज्य का पतन होने लगा।
 
King! From the time that dreadful yajna was commenced in accordance with the rituals, Dhritarashtra's kingdom began to decline. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)