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mahabharat 9.40.23-24h: राजा! सरस्वती के उस महान तीर्थ में मन को एकाग्र करके वह नियम और उपवास द्वारा अपने शरीर को सुखाने लगा।   |   mahabharat अध्याय 9.40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  9.40.23-24h 
सोऽस्मिंस्तीर्थवरे राजन् सरस्वत्या: समाहित:॥ २३॥
नियमैश्चोपवासैश्च कर्षयन् देहमात्मन:।
 
 
अनुवाद
राजा! सरस्वती के उस महान तीर्थ में मन को एकाग्र करके वह नियम और उपवास द्वारा अपने शरीर को सुखाने लगा।
 
King! Having concentrated his mind at that great pilgrimage of Saraswati, he began to dry his body by rules and fasting. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)