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mahabharat 9.40.22-23h: उन्होंने विश्वामित्र की सेना पर आक्रमण कर दिया और उन्हें चारों दिशाओं में भगा दिया। जब गाधिपुत्र विश्वामित्र ने सुना कि उनकी सेना भाग गई है, तो उन्होंने तपस्या को अधिक शक्तिशाली समझा और स्वयं को तपस्या में समर्पित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  9.40.22-23h 
ते तु तद्‍बलमासाद्य बभञ्जु: सर्वतोदिशम्।
तच्छ्रुत्वा विद्रुतं सैन्यं विश्वामित्रस्तु गाधिज:॥ २२॥
तप: परं मन्यमानस्तपस्येव मनो दधे।
 
 
अनुवाद
उन्होंने विश्वामित्र की सेना पर आक्रमण कर दिया और उन्हें चारों दिशाओं में भगा दिया। जब गाधिपुत्र विश्वामित्र ने सुना कि उनकी सेना भाग गई है, तो उन्होंने तपस्या को अधिक शक्तिशाली समझा और स्वयं को तपस्या में समर्पित कर दिया।
 
He attacked Vishwamitra's army and chased them away in all directions. When Vishwamitra, the son of Gadhi, heard that his army had fled, he considered austerity to be more powerful and devoted himself to austerity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)