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mahabharat 9.40.17: प्रयत्न करने पर भी वे सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करने में असमर्थ थे। एक दिन राजा विश्वामित्र ने सुना कि 'राक्षसों से प्रजा को बड़ा भय हो गया है।'॥17॥   |   mahabharat अध्याय 9.40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  9.40.17 
न स शक्नोति पृथिवीं यत्नवानपि रक्षितुम्।
तत: शुश्राव राजा स राक्षसेभ्यो महाभयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
प्रयत्न करने पर भी वे सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करने में असमर्थ थे। एक दिन राजा विश्वामित्र ने सुना कि 'राक्षसों से प्रजा को बड़ा भय हो गया है।'॥17॥
 
Despite their efforts, they were unable to protect the entire world. One day King Vishwamitra heard that 'The people have got great fear from the demons'.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)