Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.40.11: तात! कुशिकवंशी विश्वामित्र भी वहाँ इन्द्रियों का संयम करके निरन्तर तप करते थे। उस घोर तप के प्रभाव से उन्हें ब्राह्मणत्व प्राप्त हुआ ॥11॥ | mahabharat अध्याय 9.40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा च कौशिकस्तात तपोनित्यो जितेन्द्रिय:।
तपसा वै सुतप्तेन ब्राह्मणत्वमवाप्तवान्॥ ११॥
अनुवाद
तात! कुशिकवंशी विश्वामित्र भी वहाँ इन्द्रियों का संयम करके निरन्तर तप करते थे। उस घोर तप के प्रभाव से उन्हें ब्राह्मणत्व प्राप्त हुआ ॥11॥
Tat! Vishwamitra of Kushikvanshi also used to do penance there continuously with restraint of senses. Due to the effect of that heavy penance, he attained Brahminhood. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥