Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.40.1-2: जनमेजय ने पूछा - हे ब्रह्मन! महामुनि! अर्ष्टिसेन ने वहाँ किस प्रकार घोर तप किया तथा सिन्धुद्वीप, देवापि और विश्वामित्र ने किस प्रकार ब्राह्मणत्व प्राप्त किया? हे प्रभु! कृपया मुझे यह सब बताइए। मैं इसे जानने के लिए बहुत उत्सुक हूँ॥ 1-2॥ | mahabharat अध्याय 9.40: आर्ष्टिषेण एवं विश्वामित्रकी तपस्या तथा वरप्राप्ति । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय उवाच
कथमार्ष्टिषेणो भगवान् विपुलं तप्तवांस्तप:।
सिन्धुद्वीप: कथं चापि ब्राह्मण्यं लब्धवांस्तदा॥ १॥
देवापिश्च कथं ब्रह्मन् विश्वामित्रश्च सत्तम।
तन्ममाचक्ष्व भगवन् परं कौतूहलं हि मे॥ २॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - हे ब्रह्मन! महामुनि! अर्ष्टिसेन ने वहाँ किस प्रकार घोर तप किया तथा सिन्धुद्वीप, देवापि और विश्वामित्र ने किस प्रकार ब्राह्मणत्व प्राप्त किया? हे प्रभु! कृपया मुझे यह सब बताइए। मैं इसे जानने के लिए बहुत उत्सुक हूँ॥ 1-2॥
Janamejaya asked - O Brahman! Great sage! How did Arshtisena perform great penance there and how did Sindhudweep, Devapi and Vishwamitra attain brahminhood? O Lord! Please tell me all this. I am very eager to know this.॥ 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥