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mahabharat 9.4.8: राजेन्द्र! हे क्षत्रियों के शिरोमणि! युद्धरूपी धर्म से बढ़कर कोई दूसरा शुभ मार्ग नहीं है, जिसका आश्रय लेकर क्षत्रिय युद्ध के लिए तत्पर रहते हैं॥8॥   |   mahabharat अध्याय 9.4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  9.4.8 
न युद्धधर्माच्छ्रेयान् वै पन्था राजेन्द्र विद्यते।
यं समाश्रित्य युद्धॺन्ते क्षत्रिया: क्षत्रियर्षभ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! हे क्षत्रियों के शिरोमणि! युद्धरूपी धर्म से बढ़कर कोई दूसरा शुभ मार्ग नहीं है, जिसका आश्रय लेकर क्षत्रिय युद्ध के लिए तत्पर रहते हैं॥8॥
 
Rajendra! O head of Kshatriyas! There is no other path more auspicious than the Dharma of war, by resorting to which the Kshatriyas remain ready for war.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)