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mahabharat 9.4.51: इस प्रकार विलाप करते हुए शरद्वान के पुत्र वृद्ध कृपाचार्य भारी श्वास लेते हुए शोक और मोह से व्याकुल हो गए ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 9.4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 4: कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  9.4.51 
इति वृद्धो विलप्यैतत् कृप: शारद्वतो वच:।
दीर्घमुष्णं च नि:श्वस्य शुशोच च मुमोह च॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विलाप करते हुए शरद्वान के पुत्र वृद्ध कृपाचार्य भारी श्वास लेते हुए शोक और मोह से व्याकुल हो गए ॥ 51॥
 
Lamenting in this manner, the aged Krupacharya, son of Sharadvana, breathing heavily, became overcome with grief and fascination. ॥ 51॥
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि कृपवाक्ये चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें कृपाचार्यका वचनविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)